September 26, 2020

गणेश / Ganesh

श्री गणेश
श्री गणेश

              भगवान श्री गणेश का जन्म नहीं हुआ था बल्कि माता पार्वती के द्वारा उनकी संरचना की गयी थी। माता पार्वती ने उनकी रचना अपने शरीर के मैल से की थी। एक दिन माता पार्वती अपने स्नानगृह में स्नान कर रहीं थीं।उस समय माता पार्वती ने अपने पुत्र श्री गणेश को आदेश दिया की वे स्नानगृह के द्वार पर खड़े रहें।साथ ही ध्यान रखें की कोई भी स्नानगृह में प्रवेश न करे। तब वे अपनी माता की आज्ञा का पालन करते हुए द्वार पर खड़े होकर पहरा देने लगे।  

               उस वक़्त वहाँ पर भगवान शिव आए और जब वे अंदर जाने लगे तब श्री गणेश ने उन्हें रोका। तब शिव जी ने उन्हें समझाया के हे पुत्र यह मेरा ग्रह है अत: तुम मुझे अंदर जाने से नहीं रोक सकते हो। यह कहकर शिव जी घर में प्रवेश करने ही वाले थे की श्री गणेश ने उनसे फिर से कहा की हे देव मैं यहाँ पर अपनी माता की आज्ञा का पालन कर रहा हूँ। मुझे क्षमा करें परन्तु मैं आपको अंदर नहीं जाने दे सकता।  शिव जी ने उन्हें बहुत समझाया परन्तु जब गणेश जी ने उनकी कोई बात नहीं मानी तब ना चाहते हुए भी शिव जी को श्री गणेश पर आक्रमण करना पड़ा।  दोनों के बीच एक भयंकर युद्ध होने के बाद शिव जी ने गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया। 

                जब माता पार्वती ने यह देखा तब वो बहुत ही व्याकुल हो गयी तथा उन्होंने शिव जी से कहा मुझे मेरा पुत्र वापिस चाहिए। शिव जी ने कहा के यह असंभव है।  मैं ऐसा नहीं कर सकता परन्तु माँ तो माँ होती है अपने पुत्र को बिना सिर के निर्जीव पड़ा देख माता पार्वती अपने क्रोध पर काबू नहीं पा सकी।  वे पुरे ब्रह्माण्ड को नष्ट करने वाली थी। उस समय भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी के कहने पर शिव जी ने सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को बचाने के लिए गणेश जी को जीवित करने का निश्चय किया। 

                उन्होंने अपने विश्वसनीय नन्दी तथा अन्य लोगो को भेजा और कहा की तुम्हे सबसे मिलने वाली वो माँ जो अपने पुत्र की तरफ पीठ करके सो रही हो उस पुत्र का शीश शीघ्र अति शीघ्र मेरे सामने प्रस्तुत किया जाए।

तब वे सब उनके आदेश का पालन करते हुए वहाँ से चले गए। उन्हें सबसे पहले एक गज और गज की माँ मिले और उन्होंने बिना देर किये उस गज का शीश धड़ से अलग किया और डरते हुए उस शीश को महादेव और पार्वती जी के सामने प्रस्तुत किया। महादेव को इस पर बहुत क्रोध आया परन्तु उन्होंने उस शीश को गणेश जी के धड़ पर सजा दिया।  तभी से वे गजानन के नाम से भी जाने लगे। तभी से देव आदि महादेव ने उन्हें वरदान दिया की देवों में सर्वप्रथम श्री गणेश की पूजा होगी। महालक्ष्मी जी ने वरदान दिया की मेरी पूजा करने का फल इंसान को तभी मिलेगा जब वह तुम्हारा (श्री गणेश) का नाम मेरे साथ में लेगा। 

मुख्य जानकारी 

श्री गणेश के पिता का नाम – भगवान शिव है।

उनकी माता का नाम – माता पार्वती है।

उनकी पत्नियों के नाम – रिद्धि व सिद्धि हैं।

उनके भाई का नाम है – कार्तिकेय।

उनकी सन्तानों के नाम हैं – शुभ व लाभ।

उनका वाहन – मूषक (डिंक)।

उनका पसंदीदा भोजन – मोदक है। 

महा मंत्र 

1 .   ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।

       निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ।।

2.    श्री गणेशाय नम:

3.    श्री गजानन जय गजानन

गणेश जी की आरती पढ़ने के लिए यहाँ दबाइए 

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