September 26, 2020

दुर्गा जी की आरती

दुर्गा जी की आरती यहाँ पढ़ें। यहाँ पर आप सम्पूर्ण – दुर्गा जी की आरती का पाठ कर सकते हैं।

जय अम्बे गौरी, मैया जय मंगल मूर्ति ।

तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी

॥ॐ जय अम्बे गौरी ॥

मांग सिंदूर बिराजत, टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना ,चंद्रबदन नीको

॥ॐ जय अम्बे गौरी॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।

रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै

॥ॐ जय अम्बे गौरी॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी ।

सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुःखहारी

॥ॐ जय अम्बे गौरी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत समज्योति

॥ॐ जय अम्बे गौरी॥

शुम्भ निशुम्भ बिडारे, महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती

॥ॐ जय अम्बे गौरी॥

चण्ड – मुण्ड संघारे, शोडित बीज हरे। 

मधु – कैटभ दउ मारे, सुर सुर भयहीन करे

॥ॐ जय अम्बे गौरी॥



ब्रह्माणी – रुद्राणी माँ, तुम कमला रानी। 

आगम निगम बखानी माँ, तुम शिव पटरानी

॥ॐ जय अम्बे गौरी॥

चौंसठ योगिनि मंगल गावत, नृत्य करत भैरू।

बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू

॥ॐ जय अम्बे गौरी॥

भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्परधारी।

मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी

॥ॐ जय अम्बे गौरी॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। 

भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता

॥ॐ जय अम्बे गौरी॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।

श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति

॥ॐ जय अम्बे गौरी॥

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै ।

कहत शिवानंद स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै

॥ॐ जय अम्बे गौरी॥

जय आंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी,

मैया जय मंगल मूर्ति,मैया जय आनंद करनी। 

तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी

/॥ॐ जय अम्बे गौरी ॥

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