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नवरात्रि

Hindu Cultures, Religion, Festivals

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नवरात्रि

नवरात्रि हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व है। नवरात्रि को नवदुर्गा और दुर्गा पूजा के रूप में भी जाना जाता है इन दस दिनों और नौ रातों में हिन्दू माँ दुर्गा की पूजा करते हैं। नवरात्रि के दसवें दिन को दशहरा के रूप में मनाया जाता है । पूरे भारत में नवरात्रि को मनाया जाता है क्योंकि यह हिंदुओं के लिए एक मुख्य त्योहार है। नवरात्रि पूरे भारत में, विशेषकर उत्तरी राज्यों में धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बहुत लोकप्रिय है।

इनमें से अधिकांश राज्यों में, शक्ति मंदिरों में एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है।

नवरात्रि में प्रार्थना और उपवास करते हैं।

उत्सव शुरू होने से पहले, अपने घर में देवी के स्वागत के लिए घर की सफाई की जाती है।

पूजा करने वाले भक्त पूरे नौ दिनों तक उपवास रखते हैं।

पूजा की विधि:-

नवरात्री में माँ दुर्गा की नौ दिनों के लिए पूजा होती है और दसवें दिन को दशहरा के रूप में मनाया जाता है। इन नौ दिनों में 8 दिन देवी रानी के लिए व्रत रखा जाता है और नौवें दिन हवन करके और 9 कन्याओं को भोजन करा कर यह व्रत खोला जाता है।


नवरात्री के पहले दिन माता रानी की चौकी सजाई जाती है। साथ ही एक कलश में जल व गंगाजल रखा जाता है। 9 दिनों तक हर रोज तैयार होकर माता रानी की पूजा की जाती है। उनकी पूजा में ज्योत बत्ती, धुप बत्ती, अगर बत्ती व कन्डी (उपला) जलाये जाते हैं। उपले में घी डालकर उसे प्रज्वलित किया जाता है, और उसमे देवी माँ के लिए लॉन्ग, इलाइची, सुपारी, गूगर, प्रशाद व सामग्री अर्पण की जाती है। 8 दिनों तक इसी पूजा के बाद 9वें दिन लोग इस हवन को कर के 9 कन्यांओं को भोजन करा कर अपना उपवास खोलते हैं।

भोजन:-

नवरात्री के व्रत के दौरान किसी भी तरह का अन्न वर्जित है। इस व्रत के दौरान शाम को लोग फल खा सकते हैं और शाम की पूजा के बाद कुट्टू या सिंगाड़े के आटे से बनी कोई समग्री, आलू की सब्जी (सेंधा नमक और काली मिर्च का इस्तेमाल करके) बना कर खा सकते हैं।

नवमी के दिन व्रत खोलने से पहले पूड़ी, सब्ज़ी, सूजी का हलवा व काले चने बनाये जाते हैं। और उस दिन की पूजा में इनका भोग लगाया जाता है, उसके बाद यही भोजन 9 कन्याओं को कराया जाता है, जिसे सब कन्या-लंगुरा भी कहते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के बाद नवरात्री का व्रत खुलता है।

नवरात्रि

दिन की पूजा

नवरात्रि के पहले तीन दिन माँ दुर्गा के दिन होते हैं।

इन तीन दिनों में हिंदू ऊर्जा और शक्ति की पूजा करते हैं।

चौथे से छठे दिन तक महालक्ष्मी की पूजा होती है।

इन दिनों में हम सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं

नवरात्रि का सातवां दिन माँ सरस्वती के लिए मनाया जाता है।

ज्ञान, कला और वास्तु के लिए हिंदू पूजा करते हैं।

सभी असुरों पर माँ दुर्गा की जीत के लिए नवरात्रि का आठवां दिन मनाया जाता है।

लोग इस दिन साहस और अच्छाई की जीत के लिए पूजा करते हैं।

नवरात्रि के नौवें दिन हिंदू नवरात्रि पर मां दुर्गा की अंतिम पूजा के साथ अपना उपवास खोलते हैं।

अगले दिन नवमी (नवरात्रि के दसवें दिन) को दशहरा के रूप में मनाया जाता है।

कथा

ब्रह्माजी ने श्रीराम से लंका-युद्ध में रावण वध के लिए चंडी देवी का पूजन कर देवी को प्रसन्न करने को कहा और चंडी पूजन और हवन हेतु दुर्लभ एक सौ आठ नीलकमल की व्यवस्था की गई। वहीं दूसरी ओर रावण ने भी अमरता के लोभ में विजय कामना से चंडी पाठ प्रारंभ किया। इधर हवन सामग्री में पूजा स्थल से एक नीलकमल रावण की मायावी शक्ति से गायब हो गया और श्रीराम का संकल्प टूटता-सा नजर आने लगा।

भय इस बात का था कि देवी माँ रुष्ट न हो जाएँ। दुर्लभ नीलकमल की व्यवस्था तत्काल असंभव थी, तब भगवान राम को सहज ही स्मरण हुआ कि मुझे लोग ‘कमलनयन नवकंच लोचन’ कहते हैं, तो क्यों न संकल्प पूर्ति हेतु एक नेत्र अर्पित कर दिया जाए और प्रभु राम जैसे ही तूणीर से एक बाण निकालकर अपना नेत्र निकालने के लिए तैयार हुए, देवी वहां पहुंची , तब वह हाथ पकड़कर कहती है – हे राम मैं प्रसन्न हूँ और विजयश्री का आशीर्वाद दिया। वहीं रावण के चंडी पाठ में यज्ञ कर रहे ब्राह्मणों की सेवा में ब्राह्मण बालक का रूप धर कर हनुमानजी सेवा में जुट गए। निःस्वार्थ सेवा देखकर ब्राह्मणों ने हनुमानजी से वर माँगने को कहा।

इस पर हनुमान ने विनम्रतापूर्वक कहा- प्रभु, आप प्रसन्न हैं तो जिस मंत्र से यज्ञ कर रहे हैं, उसका एक अक्षर मेरे कहने से बदल दीजिए। ब्राह्मण इस रहस्य को समझ नहीं सके और तथास्तु कह दिया। मंत्र में जयादेवी… भूर्तिहरिणी में ‘ह’ के स्थान पर ‘क’ उच्चारित करें, यही मेरी इच्छा है।भूर्तिहरिणी यानी कि प्राणियों की पीड़ा हरने वाली और ‘करिणी’ का अर्थ हो गया प्राणियों को पीड़ित करने वाली, जिससे देवी रुष्ट हो गईं और रावण का सर्वनाश करवा दिया। हनुमानजी महाराज ने श्लोक में ‘ह’ की जगह ‘क’ करवाकर रावण के यज्ञ की दिशा ही बदल दी।

सभी नौ दिन हम “माँ दुर्गा” के एक अलग चेहरे के लिए प्रार्थना करते हैं:-

  1. शैलपुत्री
  2. ब्रह्मचारिणी
  3. चंद्रघंटा
  4. कुष्मांडा
  5. स्कंदमाता
  6. कात्यायनी
  7. कालरात्रि
  8. महागौरी
  9. राम नवमी

नवरात्री 2020:-

2020 में नवरात्रि की तारिक है –
17 – अक्टूबर -2020 से 24 – अक्टूबर – 2020

माँ दुर्गा की आरती पढ़ने यहाँ क्लिक करें।

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