September 26, 2020

शिव / Shiv

भगवान शिव का परिचय व शिव जी के नाम व ज्योतिर्लिंग :- शिव जी

Lord Shiva
  • देव आदि देव महादेव के नाम से भी प्रख्यात भगवान शिव हिन्दुओं के प्रमुख देवताओं में से एक हैं।
  • शिव स्वयं एक आदि शक्ति हैं।
  • भगवान शिव की अर्धांगिनी का नाम “पार्वती” है तथा उनके पुत्रों का नाम कार्तिकेय और गणेश है।
  • भगवान शिव के परिवार में नाग, भुत – प्रेत, मयूर, मूषक, सिंह व नंदी का निवास है।
  • शिव अनादि हैं भगवान शिव का ना कोई अंत है, ना कोई आरम्भ है।
  • जब कुछ नहीं था तब भी शिव थे और जब कोई नहीं होगा तब भी शिव होंगे। 
  • सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड भगवान शिव के अंदर समाया हुआ है इसलिए उन्हें महाकाल भी कहते हैं।
  • अपने इस रूप से वो सम्पूर्ण सृष्टि का पोषण करते हैं। 
  • सम्पूर्ण सृष्टि का आधार भगवान शिव के इसी स्वरुप पर आश्रित है, इसीलिए यह रूप सबसे कल्याणकारी माना जाता है। 
Shiv Ji

पहचान 

  • उनके के मस्तक पर चन्द्रमा विराजमान है।
  • भगवान शिव हाथों में त्रिशूल और डमरू है।
  • उनके गले में हार स्वरुप विषधारी सर्प विरमान है।
  • ऐसी अदभुत छबि लेकर कैलाश पर्वत पर अपनी अर्धांगिनी माता पार्वती के साथ विराजमान रहते हैं भगवान शिव।
  • सभी देवताओं में भगवान शिव एकमात्र ऐसे देव हैं जो की अपने भक्तों से सबसे जल्दी प्रसन्न होते हैं तथा फल स्वरुप उन्हें वरदान ही दते हैं। 
  • वे अपने भक्तगणों को कभी भी उदास नहीं देख सकते।
  • भगवान शिव तो खुद ही परब्रह्म हैं। 
  • वे अपने हर भक्त को अपने पुत्रों “श्री गणेश व कार्तिकेय” की तरह प्रेम करते हैं।
  • भगवान शिव को सौम्य रूप और रौद्र रूप दोनों के लिए जाना जाता है।
  • भगवान शिव की पूजा मूर्ति व शिवलिंग दोनों रूपों में की जाती है।  भगवान शिव दुखों को हरने वाले हैं।
  • शंकर, आदिदेव, त्रियंवक, महेश, महाकाल, भोलेनाथ, विषधर, मृत्युंजय, नीलकंठ आदि नामों से भी भगवान शिव को जाना जाता है।
  • महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की पूजा करने के लिए सबसे पवित्र त्यौहार माना जाता है। 
Shivling

मुख्य ज्योतिर्लिंग 

  • सोमनाथ
  • घुष्मेश्वर
  • महाकालेश्वर
  • ओंकारेश्वर
  • केदारनाथ
  • पशुपतिनाथ
  • भीमशंकर
  • विश्वनाथ
  • त्र्यंबकेश्वर
  • वैद्यनाथ
  • नागेश्वर
  • रामेश्वरम

महादेव के प्रमुख मंत्र

ॐ नम: शिवाय

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ, त्र्यम्बक यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धन्म।

उर्वारुकमिव बंधनात, मृत्येर्मुक्षीय मामृतात्॥

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